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Showing posts from February, 2023

कारगिल के हीरो – कैप्टन विक्रम बत्रा, जो हमेशा बोलते थे “ये दिल मांगे मोर”

दुनिया में हुए हर युद्ध से कोई ना कोई हीरो बनके निकलता है। चाहे हो विश्व युद्ध हो, सोवियत युद्ध या फिर कोई और युद्ध। ऐसे ही एक युद्ध हमने लड़ा था पाकिस्तान से साल 1999 में। उस युद्ध में हमारे सैकड़ों जवान भारत की आन-बान-शान पर खुद को कुर्बान कर दिए और हिंदुस्तान को एक बार फिर से पूरी दुनिया में सर ऊँचा करने का मौका दिया। इस युद्ध में हमने कई बेशकीमती हिरे खो दिए, जिसका मलाल हर भारतीय को हमेशा रहेगा। आज उन्हीं हीरो में से एक हीरो की बात होगी –  कैप्टन विक्रम बत्रा । जन्म, पारिवारिक माहौल और पढ़ाई – Early Life of Captain Vikram Batra 9 सितम्बर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले के गोद में बसा एक छोटे से गाँव घुग्गर में उनका जन्म हुआ था। पिता का नाम जी एल बत्रा और माता का नाम कमलकांता था। माता कमलकांता की श्रीरामचरितमानस में गहरी श्रद्धा थी तो उन्होंने दोनों का नाम लव-कुश रखा। लव यानी विक्रम और कुश यानी विशाल। विक्रम और विशाल बत्रा दोनों जुड़वाँ थे। पहले डीएवी स्कूल, फिर सेंट्रल स्कूल पालमपुर में दाखिल करवाया गया। आर्मी कैंट में स्कूल होने से सेना के अनुशासन को देख और पिता से देश प...

कारगिल के हीरो – कैप्टन विक्रम बत्रा, जो हमेशा बोलते थे “ये दिल मांगे मोर”

दुनिया में हुए हर युद्ध से कोई ना कोई हीरो बनके निकलता है। चाहे हो विश्व युद्ध हो, सोवियत युद्ध या फिर कोई और युद्ध। ऐसे ही एक युद्ध हमने लड़ा था पाकिस्तान से साल 1999 में। उस युद्ध में हमारे सैकड़ों जवान भारत की आन-बान-शान पर खुद को कुर्बान कर दिए और हिंदुस्तान को एक बार फिर से पूरी दुनिया में सर ऊँचा करने का मौका दिया। इस युद्ध में हमने कई बेशकीमती हिरे खो दिए, जिसका मलाल हर भारतीय को हमेशा रहेगा। आज उन्हीं हीरो में से एक हीरो की बात होगी –  कैप्टन विक्रम बत्रा । जन्म, पारिवारिक माहौल और पढ़ाई – Early Life of Captain Vikram Batra 9 सितम्बर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले के गोद में बसा एक छोटे से गाँव घुग्गर में उनका जन्म हुआ था। पिता का नाम जी एल बत्रा और माता का नाम कमलकांता था। माता कमलकांता की श्रीरामचरितमानस में गहरी श्रद्धा थी तो उन्होंने दोनों का नाम लव-कुश रखा। लव यानी विक्रम और कुश यानी विशाल। विक्रम और विशाल बत्रा दोनों जुड़वाँ थे। पहले डीएवी स्कूल, फिर सेंट्रल स्कूल पालमपुर में दाखिल करवाया गया। आर्मी कैंट में स्कूल होने से सेना के अनुशासन को देख और पिता से देश प...

जानिए उस महिला को जिसने भारत-नेपाल रिश्ते को जहरीला बना दिया है।

नेपाल और भारत के रिश्ते हमेशा से ऐसे नहीं थे। भारतीय और नेपाली नागरिक को कभी भी एक दूसरे के देश में जाने पर कोई वीजा-पासपोर्ट नहीं माँगा गया। द्वार दशकों से ऐसे ही खुले थे। इनफैक्ट जब नेपाल में राजशाही था तब तो बॉर्डर एरिया के लोगों को पता ही नहीं चलता था कि हम कब इंडिया से नेपाल और नेपाल से इंडिया आ गए। जबकि अब परिस्थिति कुछ और है। समय बदल चूका है। बिहार राज्य के सीतामढ़ी जिले से सटे नेपाल बॉर्डर पर कुछ दिनों पहले गोलाबारी भी हुई थी जिसमें तीन भारतीय नागरिक की मौत हो गयी थी। कुछ मिडिया रिपोर्ट्स की माने तो वहां पर अब वायर फेंसिंग का काम भी शुरू होने वाला है। स्थिति इतनी भयावह हो जाएगी ,यह किसने सोचा था। लेकिन यह सब हो रहा है। फरवरी 2018 में जब से केपी शर्मा ओली नेपाल के प्रधानमंत्री बने है तभी से भारत-नेपाल के रिश्तों में खटास बढ़ गयी है। इन खटास के पीछे एक महिला का नाम बहुत जोर-शोर से सामने आ रहा है और जिसे नकारा भी नहीं जा सकता है। वो महिला है हाउ यांकी। हाउ यांकी साल 2018  से ही नेपाल में चीनी राजदूत है। क्या केपी शर्मा ओली हनी ट्रैप में फँस चुके हैं? और क्या रही है इस महिला का...

हाजी मस्तान: बिना हथियार के बम्बई पर बीस सालों तक राज करने वाला डॉन

हाजी मस्तान को बम्बई का पहला डॉन भी कहा जाता है कहानी शुरू होगी तो बहुत ही दूर तलक जाएगी। आज बहुत दिनों के बाद हम आपलोगों के लिए क्राइम बीत लेकर आये हैं। आप सभी ने हमारे क्राइम स्टोरीज को बहुत सपोर्ट किया है। चाहे हो ईदी अमीन का हो, नटवरलाल का या फिर वीरप्पन का। इसी सीरीज में हम आपके लिए लेकर आये हैं आज कहानी बम्बई का पहला डॉन हाजी मस्तान मिर्जा का। हाजी मस्तान मिर्जा वो डॉन था जिसने कभी किसी पर गोली नहीं सवहलय, कभी किसी आम आदमी को परेशान नहीं किया। वो बस एक बिजनेसमैन के तौर पर अपना काम किया। ऐसा नहीं है की उसे हम अच्छा बता रहे हैं। क्राइम कभी भी सही या गलत नहीं हो सकता। क्राइम हमेशा गलत ही होता है। लेकिन हाजी मस्तान की इमेज ऐसी थी की उसके बारे में बात करने को मन करता है। तो चलिए कहानी शुरू करते हैं। जन्म और शुरुआती जीवन 1 मार्च 1926 को भारत क्ले दक्षिणी राज्य पनाईकुलम, तमिनाडु में जन्में हाजी मस्तान का पूरा और असली नाम हैदर मस्तान मिर्जा था। उसका नाम हाजी मस्तान कैसे पड़ा इसकी कहानी आगे है। हैदर मस्तान मिर्जा एक गरीब घर में पैदा हुआ था। उनके पिता किसान थे। घर में आमदनी कुछ ज्यादा नहीं...

Violet Jessop मिस अनसिंकेबल: कभी न डूबनेवाली महिला की कहानी

जाके राखो साईयाँ, मार सके ना कोई। यह बात आज के इस कहानी पर बिलकुल फिट बैठती है। आज हम जिसकी कहानी आपके लिए लेकर आये हैं वो इस कहावत का सबसे सटीक उदाहरण हो सकता है। आइए आज जानते हैं  वायलेट जेसप  के बारे में, जो टाइटैनिक समेत दो और डूबते हुए जहाजों से बचकर निकली थी। इनका पूरा नाम वायलेट कांस्टेंस जेसप है जिसे लोग उनके प्रचलित नाम  मिस अनसिंकेबल  के नाम से जानते हैं। यानि कि कभी न डूबनेवाली महिला। वायलेट जेसप एक ऐसी साहसिक और निर्भीक महिला है जिसने विश्वविख्यात टाइटेनिक जहाज की दुर्घटना से लेकर, HMHS ब्रिटैनिक जहाज और RMS ओलिंपिक जहाज के डूब जाने के बाद भी वो जिन्दा बच निकली। HMHS ब्रिटैनिक जहाज जब डूब रहा थे तब उनके सर पर काफी गहरी चोट भी आयी थी, बावजूद इसके वो बच निकलने में कामयाब रही। तो आइए जानते हैं इस मिस अनसिंकेबल के बारे में सबकुछ। वायलेट जेसप पर वीडियो भी देख सकते हैं तीन समुद्री दुर्घटनाओं से बचकर निकलने के बाद वायलट मानो समंदर से कह रही हो कि तुम चाहे जहाज को भले ही डूबा दो लेकिन तुम मुझे नहीं डूबा सकते। इतने सारी घटनाओं के बाद भी वायलट ने जहानों पर काम करना...

सुकेश चंद्रशेखर की पूरी और असली कहानी

नोरा फतेही, सुकेश चंद्रशेखर और जैकलीन फर्नांडिस एक ठग का नाम इन दिनों खूब चर्चा बटोर रहा है और वह है सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) का। कौन है सुकेश चंद्रशेखर और यह कहाँ का रहने वाला है। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी इसके पीछे क्यों पड़ी हुई है। क्या है 200 करोड़ रूपये के पीछे की ठगी की कहानी और क्या रिश्ता है सुकेश चंद्रशेखर का बॉलीवुड ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस (Jacqline Fernandez) और नोरा फतेही (Nora Fatehi) से। सुकेश चंद्रशेखर का शुरूआती जीवन (Sukesh Chandrashekhar Biography) सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) का जन्म साल 1989 में भवानी नगर, बैंगलोर में हुआ था। उसके दोस्त उन्हें बालाजी नाम से जानते है। सुकेश चंद्रशेखर का जन्म बेंगलुरु के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम विजयन चंद्रशेखर है। सुकेश शुरुआती स्कूल की पढाई बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल, बैंगलोर से हासिल किया और अपनी आगे की पढाई पूरी करने के लिए मदुरै विश्वविद्यालय में एडमिशन ले लिया। सुकेश को बचपन से ही लग्जरी कारों और स्पोर्ट्स कारों का शौक था। सुकेश को पहली बार साल 2005 में गिरफ्तार किया ग...